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सुनाते फसाना रवाना – अनिरुद्ध कुमार

कहाँ है किसी का ठिकाना,
कलेजा कभी ना जलाना।
भरोसा नहीं आदमी का,
नजरसे लगाता निशाना।
निडर हो करें बेवफाई,
सबों का इरादा खजाना।
करों ना बुराई सिखाते
बता कौन छोड़ा सताना।
यही बात सबको बताते,
जरा सीख बचना बचाना।
भलाई बुराई नहीं कुछ,
जहाँ को तमाशा दिखाना।
यही जिंदगी की कहानी,
सुनाते फसाना रवाना।
– कुमार सिंह
धनबाद, झारखंड




