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स्त्री और गंगा – रश्मि मृदुलिका

नारायण के नख से निकली गंगा प्रवाहित हो गई,
आहत हो,प्रचंड वेग से ब्राह्मण को घेरने लगी,
समझी भावना शिव ने सहर्ष मस्तक में स्थान दिया,
और निज जटाओं में उन्हें धारण किया,
बंधन में भी सुख पाया और सदा के लिए ठहर गई,
एक लट से निकल कर धरा तक जाने को तैयार हुई,
शिव के सम्मान पर गंगा नतमस्तक हो गई,
स्त्री स्वभाव बस ऐसा ही है,
मिली उपेक्षा बैंकुठ धाम से स्वयं निष्कासित हो गई,
जहाँ मिला प्रेम और सम्मान स्वयं समर्पित हो गई,
– रश्मि मृदुलिका, देहरादून , उत्तराखंड




