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हल्द्वानी के मानवेन्द्र: जहाँ किताब, समाज और बदलाव एक साथ मिलते हैं

हल्द्वानी। कल्पना कीजिए, कक्षा 12 का एक छात्र, जिसकी उम्र अभी संघर्षों और सपनों के बीच झूलती हो, वह न सिर्फ़ किताब लिखता है बल्कि उससे कमाई का हिस्सा समाज को लौटाने का संकल्प भी लेता है। यही हकीकत है मानवेन्द्र की, जो हल्द्वानी से निकलकर आज युवाओं की प्रेरणा बन चुके हैं।


हाल ही में प्रकाशित उनकी पुस्तक द ऑक्सीजन काउंटडाउन महज़ एक विज्ञान–थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह इंसानी लालच और उम्मीद की गहरी परतों को उजागर करती है। कहानी का केंद्र डॉ. डैन वॉस है, जो विज्ञान और मानवीय संवेदनाओं के बीच खींची गई एक पतली रेखा पर चलता है। यह किताब पाठकों को झकझोरती है और सोचने पर मजबूर करती है।

लेखन के साथ–साथ मानवेन्द्र की असली पहचान है उनका सामाजिक जुड़ाव। वे धात (Dhaat) एनजीओ के साथ मिलकर बाल शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी वे लगातार युवाओं को जागरूक कर रहे हैं।
TEDx मंच पर उन्होंने “आज की युवा पीढ़ी को इंतजार छोड़कर निर्माण क्यों शुरू करना चाहिए” विषय पर बोलते हुए यह संदेश दिया कि बदलाव का सही समय कल नहीं, बल्कि आज है।

सबसे बड़ी बात यह कि उन्होंने यह घोषणा की है कि पुस्तक की आय का 25 प्रतिशत हिस्सा चैरिटी और सामाजिक कार्यों में जाएगा। कम उम्र में लिया गया यह निर्णय उन्हें अलग पहचान देता है और यह साबित करता है कि नई पीढ़ी न सिर्फ़ सपने देख रही है, बल्कि समाज को बेहतर बनाने की राह भी तलाश रही है।
आज मानवेन्द्र उन युवाओं का प्रतीक हैं जो मानते हैं कि कलम से क्रांति और विचारों से बदलाव लाया जा सकता है।

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