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हो निर्मल आचरण – सुनील गुप्ता

( 1 ) हो
आचरण निर्मल हमारा,
कहें वही, जो हम करें !
पर उपदेश कुशल बहुतेरे..,
जे आचरहिं, ते नर न घनेरे !!
( 2 ) हो
सात्विकतापूर्ण विचार हमारे,
आचरण में वो परिलक्षित होएं !
हो कथनी, मीठी खांड जैसी….,
और करनी, हो विष की लोए !!
( 3 ) हो
आचरण श्रेष्ठ यदि,
तो मौन, श्रेयस्कर स्थिति हमारी !
वरना करें कुछ और कहें कुछ और..,
इस दोहरेपन से बचें, बेहतर होगा यहीं !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान




