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छत्तीसगढ़ की शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ को मिला ‘विद्या वाचस्पति’ मानद सम्मान – 2025

utkarshexpress.com मुंगेली (छ.ग.) – उत्तराखंड की पुण्य भूमि हरिद्वार में स्थित श्री हरिगंगा धाम, भूपतवाला में कहानिका हिंदी पत्रिका और काशी हिंदी विद्यापीठ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में 12 जुलाई ‘2025 को संपन्न अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सह विद्या वाचस्पति मानद सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित लेखिका, कवयित्री एवं साहित्यसेवी शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ को उनकी निरंतर साहित्य सेवा, शोध ,रचनात्मक योगदान एवं हिंदी साहित्य के संवर्धन हेतु काशी हिंदी विद्यापीठ उत्तर प्रदेश द्वारा “विद्या वाचस्पति मानद सम्मान 2025” (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर) एवम् मकस कहानिका झारखण्ड द्वारा “काव्य रत्न 2025” से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उत्तराखंड महापौर, काशी विद्यापीठ के कुलाधिपति एवम् कुलसचिव के कर कमलों से प्रदान किया गया। इस आयोजन में निहारिका स्वास्थ्य के कारण उपस्थित नही थी अतः उन्हें यह उपाधि तात्कालिक वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन प्रदान की गई।
गौरतलब है कि शिखा गोस्वामी मकस की केंद्रीय सूचना प्रभारी हैं और संस्था के सभी कार्यों में सक्रिय रुप से योगदान देती हैं।
यह गरिमामय आयोजन नगर निगम हरिद्वार की महापौर श्रीमती किरण जैसल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में काशी हिंदी विद्यापीठ के उप कुलाधिपति डॉ. ओमप्रकाश पांडेय, कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी एवं कहानिका के प्रधान संपादक डॉ. श्याम कुंवर भारती उपस्थित रहे। देशभर से आए चयनित साहित्यकारों की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य समारोह में काव्य की अविरल धारा बहती रही।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली ज़िले के चंद्रखुरी से संबंध रखने वाली मारोगढ़ की शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ पिता कमल गिरी पिछले 8 वर्षों से साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे न केवल एक संवेदनशील कवयित्री हैं, बल्कि कहानी, उपन्यास और सामाजिक विषयों पर रचनात्मक लेखन में भी सिद्धहस्त हैं। उनकी अब तक कुल 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 5 एकल (कुछ भीगे अल्फाज़ों में, वजह मिल गई, निहारिका की प्रेरक कथाएँ, आकांक्षी (उपन्यास), Aspirant (उपन्यास – अंग्रेज़ी में) और 4 साझा संग्रह (मेहंदी हाथों की, निर्भया सांझ, उपवन,‌ गिरिराज नंदनी गिरिजा) हैं।
शिखा की रचनाएँ कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें देश के विभिन्न साहित्यिक मंचों से सम्मानित किया गया है। वे अपने स्वास्थ्य संबंधी संघर्षों के बावजूद साहित्य साधना को कभी विराम नहीं देतीं, बल्कि अपने संघर्ष को लेखनी के माध्यम से समाज के सामने लाकर उसे प्रेरणा में बदल देती हैं।
निहारिका वर्तमान में भारत की पहली ट्रांसजेंडर अंतरिक्ष वैज्ञानिक पर आधारित उपन्यास “शून्य से शिखर तक”, तैयार कर रही हैं। उनकी रचनात्मक दृष्टि और संवेदनशीलता उन्हें आज की अग्रणी महिला साहित्यकारों में विशिष्ट स्थान दिलाती है।
हरिद्वार के इस मंच से “विद्या वाचस्पति” मानद उपाधि प्राप्त कर उन्होंने छत्तीसगढ़ को गौरवांवित किया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहित्यिक जीवन का एक स्वर्णिम अध्याय है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की साहित्यिक प्रतिभा को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करता है।
इस उपाधि को पाकर निहारिका बेहद उत्साहित हैं, उनका कहना है कि – “यह सम्मान पाना किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं बचपन से कुछ बड़ा करना चाहती थी, जिससे मेरा नाम मरने के बाद लोग याद रखे। मैं पढ़ाई में तेज थी पर हालातों और बीमारी के चलते मेरी पढ़ाई छूट गई और मैं थोड़ी हताश हो गई क्योंकि मैं पढ़कर आगे बढ़ना चाहती थी पर अब वो संभव नही था। लेकिन मैंने हिम्मत नही हारा और कलम को अपनी ताकत बनाया। ईश्वर की कृपा और बड़ों के आशीर्वाद से आज यहां तक पहुंच पाई हूँ। यह सम्मान मेरे भविष्य की एक सीढ़ी है जिसपर चढ़ कर आगे का सफर तय करना है और दुनिया को दिखाना है कि तमाम कमियों के बावजूद मैने कुछ करके बताया है।”
शिखा के इस उपलब्धि पर साहित्य जगत के तमाम चमकते सितारों ने उन्हें बधाईयाँ दी और साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आज के युवा जब छोटी छोटी बातों को लेकर आत्महत्या कर लेते है ऐसे में बीमारी के बावजूद हालातों से लड़कर अपने आपको दुनिया के सामने लाना, कोई इनसे सीखें। शिखा का यह सम्मान युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणा है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अगर आप में जज़्बा है, तो मंज़िल निश्चित मिलती है।

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