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संबंधों की अहमियत – निहारिका झा

संबंधों की इस देहरी पर
नेह अल्पना आज सजाएं।
बीती बातों को बिसार कर
आगाज नई पहल कर जाएं।
जब रहते पास हैं अपने
अहमियत नहीं हैं जान सके
ज्यों दूर हुए वो नजरों से
उनकी कमी हमें खल जाए।
क्यों न इक कोशिश ऐसी हो
अपने कभी भी दूर न जाएं।
गर झुकने की नौबत आए
जरा तनिक हम खुद झुक जाएं
अहं द्वेष की गिरा दीवारें
इक दूजे में घर कर जाएं ।
संबंधों की अहमियत को,
आत्मसात हम सब कर जाएं।
संबंधों की देहरी पर,
नेह अल्पना आज सजाएं।
संबंधों की देहरी ….
-निहारिका झा, खैरागढ़ राज, छत्तीसगढ़




