मनोरंजन
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कविता – नीलांजना गुप्ता
मेरी कविता हर हृदय की मलिका बनकर आएगी। सूखे अधरों पर मधुर मुस्कान बनकर छायेगी। गम के साये में…
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सावन आया – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
सावन आया सावन आया, भीगी भीगी पवन को लाया धरती भीगी पहन हरियाली, फूलों की खुशबू ने बाग महकाया।। सावन…
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भोजपुरी लोक गीत – श्याम कुंवर भारती
बंसिया के धुनवा ये हो कान्हा जबसे सुनवला हो। ये हो कान्हा मुरलिया मोहले मन हमार, पीरितीया के धुनवा बजइए…
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सुबह – विनीति शर्मा
सुबह के इंतजार में सिमटी सी कली थी मैं… रजनी का दुशाला लिए सूरज से मिलने चली थी मैं ……
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
आ लगा ले तू ल़ग़न बढतें हुऐ सपनो के लिये। अब सम्भालेगे इल्म को भी किताबों के लिये। खूबसूरत…
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श्रीहरिनाम सुमरिन करें- सुनील गुप्ता
श्रीहरिनाम सुमरिन करें, करें आठों प्रहर, सेवा अष्टयाम !!1!! श्रीराधे-कृष्णा भजते चलें, चलें बोलते नित, राधे नाम !!2!! …
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दिव्य अनुपम अलौकिक – सविता सिंह
ज़ब शशधर की ये प्रथम किरण ज्यो पड़ती तेरे आनन पर, फैली फिर धरा के चहुँ ओर मोहक धवल उजली…
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आराधिका साहित्यिक मंच का आयोजन हुआ संपन्न
utkarshexpress.com इस्लामपुर (पश्चिम बंगाल) – आराधिका साहित्यिक मंच ( पंजी), इस्लामपुर, पश्चिम बंगाल द्वारा 04/04/2026 को स्वतंत्र विषय पर आयोजित…
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उम्र का अंतिम पड़ाव – विनोद निराश
बालों की सफेदी, चेहरे की झुर्रियाँ, धुँधली होती नयन ज्योति, चश्मे का बढ़ता नंबर , अनवरत पनपती अनेकों लालसाएं, ढलती…
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जंगल – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जंगल चुप नहीं, भीतर गाता है। हर पत्ता कोई राज सुनाता है। हवा लिखती हरियाली का गीत, धरती ओढ़े सपनों…
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