मनोरंजन
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मेरी बेटी – रेखा मित्तल
बदलते किरदार जैसे-जैसे बड़ी हो रही हूँ सब किरदार बदल रहे हैं जिन नन्हें हाथों को पकड़ कर चलना सिखाया…
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देह की दीवारें और आत्मा की पुकार – प्रियंका सौरभ
मैं स्त्री हूँ – देह से परे, मन की मौन पुकार, नमन की ज्वाला, समर्पण का उजास, किंतु देखो,…
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मुस्कान मनुहार (लघुकथा) – इंजी.अरुण कुमार जैन
utkarshexpress.com – सर्दी की ठंडी रात्रि थी, हवा में ठिठुरन थी। ट्रेन एक स्टेशन पर रुकी। भरे स्लीपर कोच में एक…
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ज़िंदगी की नक़ाबें – डॉ सत्यवान सौरभ
ऐ ज़िंदगी, तू हर रोज़ इक नया चेहरा दिखा देती है, अपनों की भीड़ में अजनबियों-सी हवा बहा देती…
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एहसास – ज्योति श्रीवास्तव
दूरियों के सितम से गुज़रते रहे, अक्स आया नज़र तो संवरते रहे। खास अहसास बन के सदा पास हो, तो…
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गीतिका — मधु शुक्ला
जब कभी गाँव छूट जाता है, व्यक्ति धन और गम कमाता है। मित्र परिवार से विलग होकर ,…
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शब्द मेरे अर्थ तुम्हारे – विवेक रंजन श्रीवास्त
utkarshexpress.com – कुछ किताबें होती हैं जो अपने पन्नो में गहरे अर्थ संजोए होती हैं। वे मन मस्तिष्क को मथती हैं।…
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जाना कहाँ तक – अनिरुद्ध कुमार
बताओ जरा और जाना कहाँ तक, मिरा साथ देगा जमाना कहाँ तक। चलें साथ मिलके अभी दूर मंजिल, हमें क्या…
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जब जाग रही होती है सारी दुनिया – गुरुदीन वर्मा
जब जाग रही होती है सारी दुनिया, तो मैं सो रहा होता हूँ , और बुन रहा होता हूँ…
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