मनोरंजन

नौतपा अगर न तपे तो क्या होता ? – सुनील गुप्ता

 

दो मूसा, दो कातरा, दो तीड़ी, दो ताय ।

दो की बादी जळ हरै, दो विश्वर दो वाय ।।

अर्थ :- नौतपा के पहले दो दिन लू न चली तो चूहे बहुत हो जाएंगे। अगले दो दिन न चली तो कातरा (फसल को नुकसान पहुंचाने वाला कीट) बहुत  हो जाएंगे। तीसरे दिन से दो दिन लू नही चली तो टिड्डियों के अंडे नष्ट नहीं होंगे। चौथे दिन से दो दिन नहीं तपा तो बुखार लाने वाले जीवाणु नहीं मरेंगे। इसके बाद दो दिन लू न चली तो विश्वर यानी सांप-बिच्छू नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे। आखिरी दो दिन भी नहीं चली तो आंधियां अधिक चलेंगी। फसलें चौपट कर देंगी।

इसलिए नौतपा की “लू” से भयभीत न होवें। ये अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ रहें, मस्त रहें एवं जीवन में धार्मिक कार्यो में व्यस्त रहें।

नवतपा (नौतपा)

( 1 )” न “, नक्षत्र

कृतिका से चलकर सूर्य,

अब नक्षत्र रोहिणी में कर रहा प्रवेश  !

और दिनकर चला अब उगलते गर्मी…,

नौतपा में जल तप रहा सारा देश प्रदेश !!

( 2 )” व “, वजूद

खतरे में पड़ा दिखे,

सभी जीव जंतु बेचैन हैं यहाँ पे  !

अब जाएं तो जाएं, बचें इससे कहाँ कैसे.,

पड़ रही तेज सूरज की लंबवत सीधी किरणे !!

( 3 ) ” त “, तपन

तीखी चुभने वाली है सीधी,

है नौतपा मानो प्रचंड अग्नि का गोला  !

लगता है ये मार ही डालेगा सभी जीव-जंतुओं को.,

अब सूझ नहीं रहा कोई यहाँ पे उपाय भला  !!

( 4 ) ” पा “, पाबंद

हुआ लगता थम गया हो जैसे शहर ,

और रुक गए कदम सभी के देख सूरज के तेवर !

दूर-सुदूर तक यहाँ आए नहीं कोई भी नज़र…,

लगता सभी छिपे बैठें हैं घर के अंदर !!

( 5 ) ” नवतपा “, नवतपा या नौतपा

कहर है या वरदान ,

ये तो श्रीप्रभु मालिक ही समझें-जानें  !

रखें जीव-जंतुओं सभी के लिए दाना-पानी भरके …,

और समझें प्रकृति की चाल, धैर्य बनाए रखें !!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button