मनोरंजन

ग़ज़ल – नित्यानंद वाजपेई

आईना बाद में दुनिया को दिखाया जाए,
पहले किरदार ज़रा ख़ुद का सजाया जाए।

सिर्फ़ अश्कों से कहाँ धुलती है दिल की कालख,
ख़ुद की नीयत को भी गंगा सा बनाया जाए ।

हर कोई ज़ेर-ए-लब बात यहाँ करता है,
क्यों न सच बोल के महफ़िल को जगाया जाए ।

जीत लीं हम ने कई जंगें ज़माने से मगर,
अब अना को भी ज़रा अपनी हराया जाए।

मुस्कुरा कर ही मिलें सब से यहाँ उपमन्यु,
कोई शिकवा हो अगर दिल से मिटाया जाए।
नित्यानंद वाजपेई “उपमन्यु”फर्रूखाबाद, उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button