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‘तुम्हारे लिये’ गीत ग़ज़ल संग्रह – सुधीर श्रीवास्तव

utkarshexpress.com गोण्डा-  वरिष्ठ गीतकार/गजलकार डॉ. जे. एन. भारती ‘बैरागी’ का गीत ग़ज़ल संग्रह ‘तुम्हारे लिये’ समर्पित सौंदर्य-बोध को उकेरने के प्रयासों जैसा प्रतीत होता है, क्योंकि संग्रह के गीतों–ग़ज़लों में मानवीय मूल्यों की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। अपने माता–पिता, गुरुजन तथा समस्त सहयोगियों को समर्पित संग्रह में अपनी सृजन यात्रा के जड़ों की विनम्र स्वीकार्यता रचनाकार के उच्च भावात्मक दृष्टिकोण और आंतरिक संवेदनात्मकता के साथ, संस्कार , वैचारिकी और श्रेष्ठता का इशारा है, वर्तमान पीढ़ी के विशेष कर आज की युवा पीढ़ी के लिए यह एक आइना है।
साहित्य साधना पत्रिका के प्रधान संपादक रामेंद्र सिंह राज द्वारा दी गई शुभकामना की
‘साहित्य के पुरोधा हैं, ग़ज़ल के महारथी,
शब्दों से आपकी, उतारें राज आरती।’

कृतिकार की साहित्यिक चेतना का शब्द चित्र उकेरने में सक्षम है।

मेरे दो शब्द में कवि ने –
शब्दों -के- मोहब्बत में कदम क्या पड़े
सारे जहां की नजरों ने बदनाम कर दिया।

लेखक के प्रति अपने भावों को शब्द देते हुए डा. आर. सी. वर्मा ‘रागी’ की पंक्तियां समीचीन हैं –
सदा ब्योम में चमकिले बनके सुघर नक्षत्र।
ग़ज़ल संग्रह सब जन पढ़ें, यत्र-तत्र सर्वत्र।।

अपनी समीक्षा में वरिष्ठ गजलकार ‘वहम हथौरवी’ जी लिखते हैं कि ऐसा लगता है कि ‘तुम्हारे लिए’ की रचनाएं अथाह के सागर में डूबकर, नहाकर आयी हों, जिनसे आपका गहरा वास्ता है।
डा. अंबेडकर फैलोशिप सम्मान से शिव बालक राम सरोज का मानना है कि कवि ने अपने जीवन के उतार चढ़ाव में आने वाली कठिनाईयों और बाधाओं का किस प्रकार विकल्प चुना है, रचनाओं में दृष्टिगोचर होता है।

रचनाकार के साहित्यिक अवदान को प्रतिष्ठा प्रदान करने में समर्थ संग्रह के गीतों-ग़ज़लों का वृहद संसार रचनाकार के गहन अध्ययन, चिंतन और वैचारिक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। विविध शीर्षको के माध्यम से कवि ने अपने रचना संसार को व्यापक, भावपूर्ण और संवेदी बनाने में कोई कसर नही छोड़ा है, जो अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित होने का उदाहरण है।
वैसे भी गीतों/ग़ज़लों का दायरा विराट है, जो रचनाकारों ही नहीं पाठकों को भी अपने में समाहित करने में समर्थ था का बोध कराता है।
अंतिम पृष्ठों में लेखक-परिचय के साथ पूर्णता तक पहुंची प्रस्तुत गीत ग़ज़ल ‘तुम्हारे लिये’ पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम होने साथ नवोदित कलमकारों के लिए उपयोगी साबित होने में सक्षम है।
अंत में यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि प्रस्तुत संग्रह ग़ज़ल/गीत प्रेमियों और संवेदनशील पाठकों के लिए संग्रहणीय कृति के साथ अपनी छाप छोड़ने में पूर्णतया सक्षम है।
‘तुम्हारे लिए’ की सफलता की शुभेच्छा के साथ डा. बैरागी को संग्रह प्रकाशन की बधाइयां शुभकामनाओं के साथ उज्ज्वल वैयक्तिक – साहित्यिक भविष्य की कामना के साथ……..।

पुस्तक समीक्षा
समीक्षक- सुधीर श्रीवास्तव, गोण्डा,  उत्तर प्रदेश

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