Uncategorizedमनोरंजन
नियम जो सत्ता के अनुकूल – मीना तिवारी

कलम लिखती वही
जो सत्ता के अनुकूल हो।
अगर लिख न सकी,
तो वह धूल ही धूल है।
मुड़ती धारा जैसे
नदिया का रुख हो।
कलम सजती है वहीं,
जहां सत्ता का सुख हो।
सुदृढ़ होगा कानून,
शासक भी निश्चित हो।
अपराध मिटते रहे,
घर सत्य में भी जोर हो।
न्याय बदले न कभी,
तो न बदलेगा परिवेश।
न्याय के तराजूओ में ,
नहीं मिटेगा कोई आदेश।
शी गलत का न्याय,
जब लिखेगी कलम।
जागेगा तब संविधान,
सत्य पर होगा अमल।
नियमों की रोशनी हो,
अंधेरे महल के मिटे।
श्वेत कागजों पर सदा,
कलम बिन डरे चलती हो।
-मीना तिवारी,पुणे, महाराष्ट्र



