प्रातः नमन – डॉ क्षमा कौशिक

वाणी में है मधुरता, सबके हित मन-प्राण।
धर्म देह को धार कर, प्रगटे दया निधान।।
रघुकुल-गौरव वंश मणि, कृपा सिंधु श्रीराम।
धन्य हुई भारत भूमि, धन्य अयोध्या धाम।।
राम आचरण में निहित, मर्यादा का सार।
प्रेम दया अरु त्याग का, है समष्टि व्यवहार।।
हर युग की हैं चेतना, है आदर्श विचार।
नमन राम के चरण में, करिये बारंबार।।
-डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड
Mere liye -रश्मि मृदुलिका
आज पांव नहीं थके, आज पलकें थकी है
रात भर ख़्यालों में, ये तुम्हारे संग जगी है…!
तन्हा पहले भी थे, तन्हाई में वो बात न थी,
तुम आये हो या अभी बरसातें बाकी है…..!
इस दर्द की दवा तुम थे, तुम मर्ज बन बैठे
बीमार भी हम और चरागर भी हम ही है….!
न अब कोई शिकवा, न कोई गिला बाकी है,
ज़िन्दगी क्या है बस ये कशमकश बाकी है…!
उठा कर फेंक दिया है हर एक आंसू को हमनें
ये जो ज़ख़्म है, बस इन जख्मों में सड़न बाकी हैं…!
-रश्मि मृदुलिका, देहरादून , उत्तराखंड




