मनोरंजन
बरगद जैसे पिता हमारे – सुनील गुप्ता

थे “बरगद जैसे पिता हमारे”
सदैव हँसते मुस्कुराते रहते थे !
हम पर जाते थे वो वारे-वारे.,
सभी मनचाही चीजें दिलवाते थे !!1!!
थे “बरगद जैसे पिता हमारे”
हमपे छत्रसाया बन इठलाते थे !
गम-दुःखों को भगा दूर जीवन से.,
हम पर प्रेम-प्यार बरसाते थे !!2!!
थे “बरगद जैसे पिता हमारे”
सदा हमारे संग खड़ा रहते थे !
प्रिय प्रथम शिक्षक थे वो हमारे..,
अक़्सर शिक्षाप्रद कहानियां सुनाते थे !!3!!
थे “बरगद जैसे पिता हमारे”
जीवन दर्शन अध्यात्म बतलाते थे !
देकर गए जीवन संस्कार सारे..,
मित्र बन वो संग हमारे रहते थे !!4!!
थे “बरगद जैसे पिता हमारे”
मन-बगिया पे राज करते थे !
थे वो घर कानन के फूल प्यारे..,
जो मधु मकरंदसा महका करते थे !!5!!
– सुनील गुप्ता, जयपुर,,राजस्थान |




