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भारत रत्न (चौ चरण सिंह) – जयवीर सिंह हलधर

कहते हैं जिसको चरण सिंह,नेता मज़दूर किसानों का ।
गांधी की आंधी में जिसने , रुख मोड़ा था तूफानों का ।।
हिंडन के एक किनारे पर , आंदोलन खड़ा किया जिसने ।
गोरी सत्ता को ललकारा , कद अपना बड़ा किया जिसने ।।
वो झोपड़ियों में पला बढ़ा , अंगार पचाए थे जिसने ।
निर्दोष किसानों के मुद्दे , सारे सुलझाए थे जिसने ।।1

भारत के खेत कमेरों को, साथी माना जिसने अपना।
बे- दखल जमींदारी करके, कर दिया पूर्ण उनका सपना।।
गांधी की सविनय अवज्ञा को , जिसने हथियार बनाया था ।
झोपड़ियों की चिंगारी को , जिसने अंगार बनाया था ।।
निर्भीक लोहिया का चेला , जो कभी किसी से डरा नहीं ।
जो हानि किसानों की कर दे , वो काम कभी भी करा नहीं ।।2

कुछ जिद्दी जाट बताते थे , मिट्टी से जिसका नाता है ।
सम्मान मसीहा के जैसा, खेती का भाग्य विधाता है ।।
वो हरित क्रांति का राजदूत , वो श्वेत क्रांति का अभियानी ।
जय हो भारत के कर्ण धार, जय हो खेती के सेनानी ।।
इंदिरा की कुटिल नीतियों से , जिसने समझौता नहीं किया ।
खो दिया प्रधान मंत्री पद ,लालच को न्योता नहीं दिया ।।3

वो भ्रष्टाचार निरोधक था,वो रूपक था कुरवानी का ।
अपनी शर्तों पर जला सदा, वो दीपक गांव किसानी का ।।
अधिकार किसानों के क्या हैं , उसने ही तो समझाए हैं ।
बाबा टिकैत जैसे नेता, सब उसके पीछे धाए हैं ।।
खेती में किए सुधार बहुत , अहसान किसानों पर उसका ।
संपन्न किसानी में दिखता , अनुदान किसानों पर उसका ।।4

वो चलता फिरता संस्थान,कहते हैं उसको चरण सिंह।
मानस में जिसके संविधान,कहते हैं उसको चरण सिंह ।।
दामन पर जिसके नहीं दाग ,कहते उसको चरण सिंह ।
जिसकी वाणी साक्षात आग,कहते हैं उसको चरण सिंह ।।
ऊंचा पाया जिसने मुकाम ,कहते हैं उसको चरण सिंह ।
‘हलधर’ करता जिसको प्रणाम , कहते हैं उसको चरण सिंह ।।5
– जयवीर सिंह हलधर, देहरादून

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