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शब्दों का उत्सव (विश्व कविता दिवस) – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

आज शब्दों ने दीप जलाए,
भावों ने आकाश सजाए।
मन की वीणा झंकार उठी,
कविता बनकर दुनिया सजी।
हर अक्षर में एक कहानी,
हर पंक्ति में छुपी रवानी।
आँसू भी मुस्कान बनें,
जब शब्दों में अरमान तने।
कभी प्रेम की मीठी धारा,
कभी संघर्ष का सच्चा नारा।
कभी प्रकृति का कोमल स्पर्श,
कभी समय का गहरा हर्ष।
कवि का मन एक सागर है,
जिसमें हर भाव उजागर है।
कलम उसकी जब चलती है,
दुनिया नई-सी लगती है।
विश्व कविता दिवस ये कहता,
शब्दों में ही जीवन रहता।
जो कहना हो दिल से कह दो,
कविता में अपने रंग भर दो।
आओ मिलकर गीत सुनाएँ,
भावों की सरिता बहाएँ।
कविता से जग रोशन करें,
मानवता का वंदन करें।
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम , छत्तीसगढ़

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