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सतगुरु आरती- सुधीर श्रीवास्तव

जय जय जय श्री सतगुरु देवा।
सत्य भक्ति की दीजै मेवा।।

हम बालक अबोध अज्ञानी।
होती हमसे नित नादानी।।

जो जन करें आपकी सेवा।
शरण राखिए उनको देवा।।

पाप-पुण्य का भेद न जानूँ।
तुमको ही मैं सब कुछ मानूँ।।

सतगुरु कृपा आप बरसाएँ।
पाप कर्म से हमें बचाएँ।।

उत्तम जीवन पथ दिखलाओ।
हाथ पकड़ कर हमें बढ़ाओ।।

सतगुरु नाम जपै जग जाना।
बन जाए वो ब्रह्म समाना।।

सतगुरु नाम ईश हितकारी।
सुन लो प्रभु अरदास हमारी।।

आशा का गंगाजल भरिए।
सोच हमारी निर्मल करिए।।

जो जन सतगुरु आरति गाए।
जीवन चक्र मुक्त हो जाए।।

विनती प्रभु सुधीर की सुनिए।
ताना बाना जगहित बुनिए।।

श्रेष्ठ भक्त सुधीर को चुनिए।
सदा प्रार्थना उसकी सुनिए।।

-सुधीर श्रीवास्तव, गोण्डा,  उत्तर प्रदेश

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