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सरस्वती वंदना – श्याम कुंवर भारती

लाया हूं माता आंसू शरण तुम्हारे,
गिरा पड़ा हूं मैं चरण तुम्हारे ।
लाया हूं माता……..।
विद्या की देवी माता कला की हो ज्ञाता।
अज्ञान हर लेती माता ज्ञान की हो दाता।
बारंबार करूं मै माता नमन तुम्हारे ।
लाया हूं माता…….।
काली दास को ज्ञान दिया अमर ग्रन्थ लिखवाया।
भक्तों को अपने तूने सफल पंथ दिखवाया।
मूरख अज्ञानी भारती करूं वंदन तुम्हारे ।
लाया हूं माता……….।
हंस की सवारी माता हाथ में शोभे।
वीणा का स्वर हरदम साथ में शोभे।
पा के कृपा तेरी है मन मगन हमारे।
लाया हूं माता आंसू शरण तुम्हारे।
-श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड
मो०न० .9955509286




