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सावन में भोले बाबा – श्याम कुंवर भारती

जेकरा के चाही ओकरे दिलाई रउवा हई गोसाई ये भोले बाबा।

सावन में जलवा चढ़ाई तोहके हम मनाई करी हमरो भलाई ये भोले बाबा।

प्रेमवा के मोल बाबा तोहसे बढीकें केहु नाही बुझी।

सती के शव लेकर तीनो लोक में घूमी केकरो ना सुझी।

योगी संन्यासी अलख जगाई तीनों लोक चलाई धूनिया रमाई ये भोले बाबा।

सावन में जलवा चढ़ाई………..।

भूतवा बैतलवा नंदी बयलवा संग कैलाशवा में डेरा बा।

श्मशनवा के भस्मिया देहिया मुंडमाला नगवा गरवा में घेरा बा ।

डमरू बजाई हमरो मनसा पुराई प्यारी सजनी दिलाई ये भोले बाबा।

सावन में जलवा चढ़ाई……….।

प्रेमवा पुजारी शिव माथे चनवा तिहारी गरे बिसहा फुंफकारी।

सभ कर नफ़रत मिटाई लोगवा मेलजोल बढ़ाई करी हम गोहारी ।

भाई भाई से मिलाई घरवा नेहिया बढ़ाई माई बाप के इज्जत दिलाई ये भोले बाबा।

सावन में जलवा चढ़ाई ……..।

प्रेमवा के बिना बाबा दुनिया कइसे चली झूठ फ़रेब धोखा खूब मिली।

बुझे ना केहु आदमी के आदमी जहर के बोलिया सब केहू बोली।

मुँह में मिस्री पिलाई नैना प्रेमवा जगाई भारती बेटवा बनाई ये भोला बाबा।

सावन में जलवा चढ़ाई तोहके हम मनाई करी हमरो भलाई ये भोले बाबा।

– श्याम कुंवर भारती ( राजभर )

बोकारो,झारखंड , माब.9955509286

 

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