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हिंदी – श्याम कुंवर भारती

हिंदी है हिंद के हर दिल की धड़कन।
बोले हिंदी गर्व से छाती चौड़ी पचपन।
महकती है बहती रसधार नौ रस की ।
भींगे तन मन जन नहीं कोई अड़चन।
लाती बागो बहार काव्य की फुहार।
बलखाये इतराए जैसे हो बांकपन।
जोड़े दिलो को तोड़े बंधन विविधता।
विश्व एकता सूत्रधार निर्मल बालपन।
सप्त स्वरों की झंकार झरनों संगीत।
गीतों में मल्हार वर्षे फुहार झमाझम।
नृत्य ताल भारत भाल हृदय विशाल।
भारती भक्ति हिन्दी सत सत है नमन।
-श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड




