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प्रभाती वंदन – डॉ गीता पांडेय

गुरुवर होते सूर्य सम, भरते हृदय प्रकाश।
शिष्यों को शुचि ज्ञान दे, करें तिमिर का नाश।
लक्ष्य मार्ग बनता सुगम, मिलती कृपा अपार,
मंजिल अपनी प्राप्त कर, शिष्य छुएँ आकाश।।

मिलता लौकिक ज्ञान है, जीवन बने पवित्र।
कर गुरुवर का ध्यान नित, पावन करें चरित्र।
करते जिस पर हैं कृपा, उसका हो उद्धार,
चरण कमल रजधार कर,उर महके ज्यूँ इत्र।।
– डॉ गीता पांडेय अपराजिता,सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश

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