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मुजफ्फरपुर के हमीदी कॉम्प्लेक्स में सज गई शेरो-शायरी की महफ़िल, डॉ. आरती कुमारी की पुस्तक ‘मुन्तज़िर है दिल’ का हुआ भव्य विमोचन

utkarshexpress.com मुजफ्फरपुर-  मुजफ्फरपुर का हमीदी कॉम्प्लेक्स उस समय अदबी रूहानियत से सराबोर हो उठा, जब ‘डॉ. अंसारी आसी अदबी साहित्यिक संगम’ के तत्वावधान में एक भव्य मुशायरे एवं काव्य गोष्ठी का शंखनाद हुआ। सैयद एम. हसन की सदारत और श्रवण कुमार के मखमली निज़ामत (मंच संचालन) में देश के चुनिंदा कलमकारों ने अपनी मखमली आवाज़ और पुरअसर अशआर से सुखनवरों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सविता राज की बेटियों को समर्पित रूहानी ग़ज़ल से हुई। इसके बाद महफ़िल की कमान संभालते हुए श्रवण कुमार ने उम्मीद के दीये रोशन किए, तोज्ञफट आलम सिद्दीकी ने इंसानी फितरत और बदलते रिश्तों के सौदागरों को बेनकाब किया। तरन्नुम के जादूगर अली अहमद मंज़र ने जहाँ अपनी मखमली आवाज़ से नफरत मिटाकर मोहब्बत की खुशबू बिखेरी, वहीं महफ़ूज़ आरिफ़ ने अपने बेबाक शेरों से सच का आईना दिखाया।
इस अदबी महफ़िल का सबसे खूबसूरत और तारीफ़-ए-काबिल लम्हा वह रहा, जब शायरा डॉ. आरती कुमारी की जज़्बातों से लबरेज प्रस्तुति के बीच उनके उर्दू ग़ज़ल संग्रह ‘मुन्तज़िर है दिल’ का भव्य लोकार्पण किया गया। उर्दू निदेशालय से स्वीकृत यह कृति आधुनिक शायरी में एक नया मील का पत्थर मानी जा रही है। महफ़िल के आख़िर में आयोजक डॉ. सिबगतुल्लाह हमीदी ने अपनी रचना के ज़रिए हक और संघर्ष का पैगाम देते हुए तमाम मेहमानों और श्रोताओं का दिली शुक्रिया अदा किया। गंगा-जमुनी तहज़ीब, रूहानी संवेदना और आपसी सौहार्द को समेटे यह मुशायरा मुजफ्फरपुर के अदबी इतिहास में हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। रिपोर्ट -कुमार संदीप

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