साधना वाणी’ पत्रिका के श्रीगणेशांक का भव्य विमोचन सम्पन्न
साधनावादी सूत्रधार न्यास के तत्वावधान में आयोजित हुआ गरिमामय साहित्यिक समारोह

utkarshexpress.com – साधनावादी साहित्य की वैचारिक यात्रा को एक नई दिशा प्रदान करने वाली ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के श्रीगणेशांक का ऑनलाइन विमोचन दिनांक 23 अगस्त 2026 को रात्रि 9:00 बजे आभासी माध्यम से अत्यंत गरिमामय एवं साहित्यिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेकानेक साहित्यकारों, विद्वानों एवं साहित्य प्रेमियों ने उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक अवसर को साक्षी भाव से गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ डाॅ. लवकुश तिवारी ‘माधवपुरी’ जी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात डॉ. कृष्ण कांत मिश्र जी ने सभी अभ्यागत अतिथियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
तत्पश्चात डॉ. राजीव रंजन मिश्र जी ने अपनी शानदार एवं प्रभावशाली शैली में ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के श्रीगणेशांक का भव्य आभासी विमोचन किया। इस अवसर पर गुरुदेव राम जी मिश्र ‘चित्रकार’ जी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद का स्नेहिल आशीर्वाद प्राप्त हुआ, जिसने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
तदोपरांत साधनावादी साहित्य की अवधारणा एवं प्रासंगिकता पर सार्थक विमर्श साहित्यिक विमर्श का क्रम प्रारंभ हुआ। देव अतिथि के रूप में पधारे डॉ. जय प्रकाश तिवारी, बलिया (उत्तर प्रदेश) ने साधनावादी साहित्य के स्वरूप, उसकी अवधारणा एवं वर्तमान संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने साधनावादी साहित्यिक सूत्रधार न्यास के संस्थापक आचार्य डॉ. ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ जी के उल्लेखनीय योगदान एवं इस अभिनव साहित्यिक पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय ‘गड़बड़ प्रतापगढ़ी’ जी ने साधनावादी साहित्य की अवधारणा एवं उसकी सामाजिक-साहित्यिक प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के प्रकाशन को एक उल्लेखनीय एवं सार्थक पहल बताया।
अगले क्रम में उद्भट्ट विद्वान एवं मनीषी साहित्यकार तथा सृजन मंच, सिरोही (राजस्थान) के संस्थापक डॉ. छगन लाल गर्ग ‘विज्ञ’ जी ने साधनावाद के मूल सूत्र “साधना से सृजन, सृजन से लोकमंगल” की प्रासंगिकता पर सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के समाज में व्याप्त विभिन्न बुराइयों और विसंगतियों के परिष्कार के लिए साधनावाद एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। ‘साधना वाणी’ के माध्यम से इस उत्कृष्ट साहित्यिक प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आचार्य डॉ. मधुब्रत जी के प्रयासों की सराहना की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. जे. एन. भारती ‘बैरागी’ जी ने साधनावादी साहित्य की विकास-यात्रा, वर्तमान स्थिति तथा उसके उज्ज्वल भविष्य की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने साधनावादी सूत्रधार न्यास एवं नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न साहित्यिक उपक्रमों तथा गद्य-पद्य की विविध विधाओं में निरंतर हो रहे सृजनात्मक कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
उन्होंने अपनी प्रभावशाली काव्यात्मक प्रस्तुति के माध्यम से कार्यक्रम को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान करते हुए वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर पूर्णिमा पाण्डेय जी सहित नवोदय प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान से जुड़े अनेक साहित्यकार साक्षी भाव से उपस्थित रहे।
रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच के संस्थापक डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मीडिया अधीक्षक एवं मुख्य अतिथि डॉ. सुधीर श्रीवास्तव जी सहित अनेकानेक गणमान्य साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उपस्थित साहित्यकारों मे दिनेश मिश्र ‘मुखर’ जी, डॉ. सरोज शुक्ला, सुचित्रा व्यास आदि प्रमुख रहे।
सफल संचालन एवं आभार
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन साधनावादी सूत्रधार न्यास के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य डॉ. ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’ जी ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए इस साहित्यिक यात्रा में सहयोग एवं सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
अंत में अध्यक्षीय अनुमति से डॉ. राजीव रंजन मिश्र जी ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
इस प्रकार ‘साधना वाणी’ ई-पत्रिका के श्रीगणेशांक का विमोचन समारोह केवल एक पत्रिका के प्रकाशन का अवसर न रहकर साधना से सृजन और सृजन से लोकमंगल की ओर अग्रसर साधनावादी साहित्यिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। यह आयोजन साहित्य को आत्म परिष्कार, सामाजिक चेतना एवं लोकमंगल से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक एवं स्मरणीय पहल के रूप में अंकित हुआ।




