मुजफ्फरपुर जिले के युवा साहित्यकार कुमार संदीप ‘हिंदी हितैषी’ से अलंकृत

utkarshexpress.com बंदरा (मुजफ्फरपुर) – हिंदी भाषा के प्रति निरंतर समर्पण, साहित्य-सृजन और दैनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड अंतर्गत सिमरा गांव निवासी युवा साहित्यकार एवं शिक्षक कुमार संदीप को प्रतिष्ठित ‘हिंदी हितैषी सम्मान’ से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति (पंजी.), बाजपुर, उत्तराखंड द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में प्रदान किया गया।
बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति की ओर से वर्ष भर हिंदी भाषा में लेखन करने, हिंदी के प्रति अनुराग एवं प्रतिबद्धता बनाए रखने तथा दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने वाले साहित्यसेवियों को सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में कुमार संदीप के हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति निरंतर समर्पण को रेखांकित करते हुए संस्था के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय कवि बादल बाजपुरी तथा संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय कवि पंकज शर्मा द्वारा उन्हें ‘हिंदी हितैषी सम्मान’ प्रदान किया गया।
ग्रामीण परिवेश की मिट्टी से जुड़े कुमार संदीप लंबे समय से शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे गुरु दीक्षा परिवार के माध्यम से विद्यार्थियों के बीच ज्ञान का दीप प्रज्वलित करने के साथ-साथ साहित्य-सृजन के जरिए समाज में सकारात्मक चेतना, मानवीय संवेदना और रचनात्मक विचारों की अलख जगाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज के अंतर्मन को स्पंदित करने और उसे बेहतर दिशा देने का सशक्त माध्यम है।
साहित्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और हिंदी भाषा के प्रति आत्मीय अनुराग उनके लेखन एवं सामाजिक सरोकारों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। ग्रामीण अंचल में रहकर हिंदी की सेवा और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान-वितरण का कार्य करना उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लाता है, जिसमें शिक्षा, साहित्य और सामाजिक चेतना एक-दूसरे से जुड़कर जीवन-मूल्यों को पुष्ट करते हैं।
सम्मान प्राप्त होने पर कुमार संदीप ने इसे अपने लिए गौरव के साथ-साथ नई जिम्मेदारी का अवसर बताया। उन्होंने इस सम्मान का श्रेय अपने गुरुजनों, आदरणीय जनों एवं माता-पिता को समर्पित करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद, संस्कार और मार्गदर्शन ने ही उन्हें शिक्षा एवं साहित्य की राह पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। उन्होंने सम्मान के लिए बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हिंदी भाषा के प्रति अपने समर्पण को आगे भी निरंतर बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया।
साहित्य और शिक्षा से जुड़े लोगों ने इसे ग्रामीण अंचल से निकलकर हिंदी भाषा की सेवा में सक्रिय युवा रचनाकार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की है।
सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बीच साहित्य एवं शिक्षा की लौ को प्रज्वलित रखने का उनका प्रयास नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि भाषा की सेवा केवल मंचों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने दैनिक व्यवहार, लेखन और सामाजिक जीवन में उसके सम्मानपूर्ण प्रयोग से भी की जा सकती है।




