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कविता – श्याम कुंवर भारती

सोना नहीं लेना है राष्ट्र को बचाना है।
ऊर्जा बचाना है राष्ट्र समृद्ध बनाना है।
खुद प्रधान ने किया काफिला है कम।
आओ सब मिलकर तेल बचाएं हम।
युद्ध का असर हो रहा है चिंता बड़ी ।
महंगाई अग्रसर हो रही विपदा खड़ी।
हर खास आम को बात समझाना है।
बात सोचने की है कुछ करने की है।
भावी विपदा से मगर नहीं डरने की है।
बात कुछ दिनों की भागीदार है बनना।
सबको संयम से संभल के है रहना।
दुनिया अपनी समझदारी है दिखाना।
संकट के बादल जल्दी टल जायेंगे।
बहुत जल्दी खुशियों के पल आयेंगे।
तुम्हारा हमारा सबका यही हाल है।
रखना है खुद और राष्ट्र का ख्याल है।
टल जाये भय युद्ध ईश यही मनाना है।
-श्याम कुंवर भारती,बोकारो, झारखण्ड

