मनोरंजन

मुक्ति – सुनील गुप्ता

( 1 ) मुक्ति का मार्ग

है प्रभु समर्पण..,

स्वयं अर्पण   !!

( 2 ) कर्म प्रेरणा

है ज्ञाता ज्ञान ज्ञेय..,

मुक्ति हो ध्येय !!

( 3 ) कर्म संग्रह

हैं करता करण..,

क्रिया का मोह  !!

( 4 ) बचें लोभ से

माया भ्रमजाल से..,

कर्मफल से  !!

( 5 ) जानें स्वयं को

स्वयं आत्मज्ञान से..,

व वैराग्य से  !!

( 6 ) मुमुक्षु बनें

अपने ‘स्व’, में रहें..,

सत्कर्म करें  !!

( 7 ) दर्शन करें

भगवान स्वयं में..,

प्रभु सभी में  !!

– सुनील गुप्ता

जयपुर, राजस्थान |

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