रोशनी का संकल्प – डॉ अनमोल कुमार

मैं मरूँ तो आँखें मेरी मत जलाना,
किसी अँधेरे जीवन में उजाला बन जाना।
मेरी पुतलियों में बसे जो सपने हजार,
किसी बच्चे को दे देना नया संसार।
कोख से ही जिसने देखा न सवेरा,
रंग न जाने, न जाने क्या है अँधेरा।
माँ की मूरत, पिता का चेहरा,
पहली बार देखे – जब मिले आँख का पहरा।
शास्त्र कहते – “अंगदान महादान”,
गीता कहे – “आत्मा अजर-अमर महान”।
मिट्टी में मिलकर भी जो काम आ जाए,
वो मौत नहीं, अमरत्व कहलाए।
एक जोड़ा आँखें – दो जीवन रोशन,
एक संकल्प से मिट जाए तम का हर कफन।
न जात पूछती, न धर्म देखती रोशनी,
बस इंसान को इंसान से जोड़ती रोशनी।
डॉक्टर बोले – “10 मिनट का काम है”,
मृत्यु के बाद 6 घंटे तक आराम है।
ना चेहरा बिगड़े, ना कोई तकलीफ हो,
बस फॉर्म भर दो – किसी की जिंदगी नसीब हो।
समापन –
आज नेत्रदान दिवस पर शपथ लो एक,
“जाते-जाते कर जाएँगे नेकी अनेक”।
आँखें दान कर देना उस प्रभु का प्रसाद,
क्योंकि दी हुई रोशनी कभी नहीं होती बर्बाद।
लाइन का स्लोगन:-
मरणोपरांत नेत्रदान, श्रेष्ठ है दानों में दान।
आपकी आँखें दे सकती हैं, किसी को नया जहान।”_
निष्कर्ष ;-
भारत में 1.2 करोड़ लोग कॉर्निया अंधता से पीड़ित हैं।
नेत्रदान से 2 लोग रोशनी पा सकते हैं।
मृत्यु के 6 घंटे के अंदर नेत्रदान हो सकता है।
टोल फ्री: 1919 – Eye Bank Association of India
( 10 जून नेत्र दान दिवस पर विशेष)




