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वसुधा पर फूल खिलाएं – सीमा शुक्ला

बंजर धरती पर फिर से हरियाली लाएं
फिर वसुधा पर रंग बिरंगे फूल खिलाएं।
कटे संघन वन, कानन में अब छांव कहां?
पीपल, बरगद वाला है अब गांव कहां?
पतझर में फिर धरा सरस मधुमास बुलाएं।
फिर वसुधा पर रंग बिरंगे फूल खिलाएं।
सूखे हैं खलियान नहीं खेती से आशा।
है मायूस किसान नित्य है घोर निराशा।
घन में घेरे घटा चलो सावन बरसाएं।
फिर वसुधा पर रंग बिरंगे फूल खिलाएं।
शुद्ध हवा हो नीर धरा सबको बतलाएं।
स्वच्छ रहे परिवेश जतन ऐसा कर जाएं।
सभी लगाएं वृक्ष चलो सबको समझाएं।
फिर वसुधा पर रंग बिरंगे फूल खिलाएं।
प्राणवायु हो स्वच्छ तभी जीवन की आशा।
तन मन रहें निरोग यही सबकी अभिलाषा।
मिटे प्रदूषण धरती का यह सपथ उठाएं।
फिर वसुधा पर रंग बिरंगे फूल खिलाएं।
-सीमा शुक्ला अयोध्या।, उत्तर प्रदेश।



