मनोरंजन
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पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती
कितना तुम भागोगे कब तक रुकोगे। अकेले – अकेले तुम कब तक चलोगे। खजाना ए दिल खाली कर दिया…
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ग़ज़ल – डाo किरण मिश्रा
मन है बहुत उदास.. कोई बात कीजिये, हैं आप बहुत खास कोई बात कीजिये। बादल बरस रहें हैं, मगर…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
वो जीता है गरीबी मे, दुखों को अब वो सहता है। बचा पाता नही कुछ भी,वो जितना भी कमाता है।…
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छंदों का लघु ग्रंथ छंद मणिका – सुधीर श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – वरिष्ठ कवयित्री डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ की लोकरंजन प्रकाशन, प्रयागराज से प्रकाशित कृति ‘छंद मणिका’ में लगभग सौ…
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कविता – नीलांजना गुप्ता
वासना का नाम न दो खो चुकी हूँ बहुत कुछ अब नई पहचान न दो प्यार को प्रिय वासना का…
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हिंदी हमारी पहचान – राजेश कुमार झा
हम हिंदी है हिंदी ही हमारी पहचान है – *हिंदी से ही हिंदुस्तान की शान है* *हिंदी के हर एक…
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फूल – रुचि मित्तल
फूल कभी शोर नहीं करते वे अपनी मौजूदगी का ऐलान खुशबू की धीमी रौशनी से करते हैं वे धरती की…
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तीजा पर्व का महत्व – सुनील गुप्ता
( 1 ) है तीजा पर्व अखंड सौभाग्य का., पावन व्रत !! ( 2 ) शिव पार्वती मिलन का ये…
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गोसइनीन गियाँ के परछो – अशोक कुमार यादव
मोर गोसइनीन गियाँ ह, आज मइके जाहूँ कहिथे। नइ भेजँव कहिथंव त, मुँह-कान ल फूलोए रहिथे।। ओहा का करथे कहिके,…
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किसी का मिलना – ज्योत्स्ना जोशी
अनायास स्वाभाविक या प्रारब्ध जैसा कुछ हो मिलकर कुछ दूर साथ चलना चाहना इच्छा हो साथ चलने की पुनरावृत्ति होना…
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