मनोरंजन
तुम पास हो, लगता नहीं- प्रतिभा जैन

तुम पास हो मेरे,
अब लगता नहीं।
रूठे हो,
मनाने का दिल नहीं।
वो पहली मुलाक़ात जैसी,
अब बात नहीं।
रिश्ता अब अपना खामोशी जैसा,
नई शुरुआत की कोई ख़बर नहीं,
हर बात पर शक हो जैसे,
भरोसे की कोई पहचान नहीं।
तेरे मेरा इश्क जैसे,
अब किताबों में कोई कहानी नहीं।
– प्रतिभा जैन उज्जैन, मध्य प्रदेश




