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तेरा हाल बेहाल – श्याम कुंवर भारती

घर का पता न तेरा हाल खबर तुझसे मिले मुद्दत हुई।
तेरी चाहत में बड़ी बेजार और बेजान मोहब्बत हुई।
दुनिया बसा लिया तुमने खुद ही अपनी गैर के साथ।
खुश होगा तू सोचा ख्वाबों मेरी यादों की मुसीबत हुई।
परवाह न होती गर जमाने उड़ चला आता पास तेरे।
उदास चेहरा मेरी जान की दुश्मन तेरी मासूमियत हुई।
चाहत में तेरी क्या क्या न किया एक मुस्कान के लिए।
तेरे आंखों गिरते हीरे मोती मेरे इश्क की जिल्लत हुई।
तड़प रहा दिल तेरे हाल और बेबसी तू लौट के आजा।
तेरा जो हाल हुआ तेरी मर्जी औ जिद की बदौलत हुई।
अब न मानूंगा एक न सुनूंगा तेरी दूर न जाने दूंगा तुझे।
नाजुक दिल मेरा भारती मुझपे तेरी नजर बेमुरव्वत हुई।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो,झारखंड




