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जनसमर्थन का पथ – डॉ. सत्यवान सौरभ

सत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास।
सेवा, सच, समर्पण ही, नेतृत्व की आस॥

सत्ता चाहो या चुनो, जन-जन का सम्मान।
स्वार्थ नहीं, जनहित बने, जीवन की पहचान॥
क्षणिक नहीं टिक पाएगा, झूठा हर उत्थान—
सत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास॥

संघर्षों की राह पर, मिलता सच्चा मान।
वाहवाही के शोर का, टिकता कब सम्मान॥
कर्मों से मिलता सदा, यश का ऊँचा स्थान—
सत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास॥

ख़बर वही जो सत्य हो, न बने मात्र प्रचार।
कलम न झुके स्वार्थ पर, रखे धर्म-आचार॥
सत्य सदा लिखता रहा, इतिहासों का ज्ञान—
सत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास॥

न्याय वही जो दे सके, निर्बल को अधिकार।
दिखावे की रोशनी, करती सिर्फ़ प्रचार॥
सत्य-विवेक के पथ सदा, मिलता है सम्मान—
सत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास॥

‘सौरभ’ सेवा जो करे, बिना किसी जब स्वार्थ।
जन-मन उसका साथ दे, बने वही परमार्थ॥
स्थायी होती जीत ही, जिसमें हो ईमान—
सत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ,उब्बा भवन, आर्यनगर
हिसार (हरियाणा) – 125005

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