‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वावधान में काव्य संध्या का हुआ भव्य आयोजन

utkarshexpress.com, Dehradun, Vinod Nirash (1 Sep)- जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वावधान में संस्था की संयोजिका डॉ. क्षमा कौशिक के निवास, काँवली गाँव, व्योम प्रस्थ, जी.एम.एस. रोड, देहरादून में लब्ध-प्रतिष्ठ कवियों, कवयित्रियों एवं साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति में भव्य काव्य संध्या का विधिवत आयोजन सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. राजेश डोभाल ‘राज’ तथा कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ ग़ज़लकार डॉ. इंदु अग्रवाल रहीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार जी.के. पिपिल, राधेश्याम कौशिक , विजय प्रसाद खंडूरी सहित संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ एवं अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ जी द्वारा मधुर स्वर में प्रस्तुत माँ सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन संस्था की सह-सचिव श्रीमती निकी पुष्कर ने किया।
इस काव्यात्मक अनुष्ठान में उपस्थित समस्त साहित्यप्रेमियों एवं सुधीजनों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत डॉ. क्षमा कौशिक , राधेश्याम कौशिक तथा संस्था के पदाधिकारियों द्वारा प्रेमपूर्वक किया गया।
काव्य संध्या में उपस्थित कवियों एवं श्रोताओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता से पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा, संवेदना, विचार और रचनात्मक उल्लास से भर दिया। एक से बढ़कर एक भावपूर्ण एवं विविध रंगों से सजी रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा।
संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ ने हिंदी की अस्मिता एवं गौरव को समर्पित पंक्ति “तुलसी, सूर, रहीम ने, दी जिसको पहचान।
हिंदी अपनी अस्मिता, हिंदी है सम्मान।। ”का सस्वर पाठ कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।डॉ. क्षमा कौशिक जी ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति
“नहीं शिकवा ज़माने से, तुम्हीं ने तो सताया है…”से श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं।श्रीमती निकी पुष्कर जी ने“मैं रही सोचती, ख़्वाब सजते रहे…”प्रस्तुत कर काव्य-संध्या में भावनाओं के सुंदर रंग भरे।
वहीं श्री विवेक श्रीवास्तव ने
“लाल के कितने लाल हैं, लाल रंग पहचान कर…”
की भावपूर्ण प्रस्तुति से सभी को प्रभावित किया।
इसके अतिरिक्त डॉ. इंदु अग्रवाल , डॉ. राजेश डोभाल ‘राज’ , राधेश्याम कौशिक , विजय प्रसाद खंडूरी, श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, डॉ. क्षमा कौशिक , जी.के. पिपिल , श्रीमती निकी पुष्कर , विवेक श्रीवास्तव, श्रीमती अंजना कंडवाल, भानु प्रताप सिंह सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण एवं विचारोत्तेजक रचनाओं से काव्य-संध्या को स्वाधीनता, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार, संवेदना एवं साहित्यिक चेतना के विविध रंगों से सराबोर कर दिया।
प्रत्येक रचनाकार के काव्य-पाठ में संवेदना, सामाजिक सरोकार, मानवीय मूल्यों और सौंदर्यबोध की सुगंध अनुभव की गई। कवियों की सशक्त प्रस्तुतियों ने श्रोताओं का मन मोह लिया तथा पूरे आयोजन में उत्साह और उल्लास की लहर प्रवाहित होती रही।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ ग़ज़लकार डॉ. इंदु अग्रवाल ने अपने सारगर्भित विचारों से आयोजन को पूर्णता प्रदान की।
यह काव्य संध्या अत्यंत सफल, सार्थक, गरिमामयी एवं स्मरणीय रही और उपस्थित सभी साहित्यप्रेमियों के हृदय में अविस्मरणीय स्मृतियाँ छोड़ गई।
इस सफल आयोजन के लिए समस्त सुधी श्रोताओं, कवियों, साहित्यकारों एवं सहयोगियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
संस्था द्वारा आयोजित इस साहित्यिक अनुष्ठान को सफल बनाने हेतु संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ जी एवं समस्त पदाधिकारियों ने उपस्थित सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं साहित्यप्रेमियों के प्रति हृदय से आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त की।




