
( 1 ) लहू से लिखी
आजादी की दास्तां.,
भूले न भुलायी जा सके !!
( 2 ) शहीदों ने दिखायी
चले देते कुर्बानियां.,
जिन्हें सुन गर्वान्वित हो सके !!
( 3 ) जिस्म पे ऊकेरी
कष्टों की कहानियाँ.,
वीर चुपचाप सहते चले गए !!
( 4 ) आजादी की दीवानगी
चला दिखाता रास्ता..,
बेड़ियों को तोड़ते बढ़ते गए !!
( 5 ) स्वतंत्रता की कहानी
भरती जोश उमंग सदा.,
जिन्हें सुन हम बढ़े हुए !!
– सुनील गुप्ता,जयपुर राजस्थान |




