मनोरंजन

लौट आना – सुनील गुप्ता

लौट आना रे

ए प्रिय सखी तुम,

न तरसाना !!1!

 

भुला न देना

वहां पहुंच कर,

ख्याल रखना !!2!!

 

मान-सम्मान

तुम्हारे हाथों में है,

इसे बचाना  !!3!!

 

समय का क्या

है अच्छा या ख़राब,

‘स्व’,  में रहना !!4!!

 

बदलने की

करना न कोशिशें,

मस्त रहना !!5!!

 

मन प्रकृति

सरसाए हर्षाए,

खिले रहना !!6!!

 

यादों में सदा

हमें बसाए चलें,

यही तमन्ना !!7!!

सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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