मनोरंजन
चाय की चुस्कियाँ – नीलांजना गुप्ता

याद आती बहुत चाय की चुस्कियाँ।
हैं रूलाती बहुत चाय की चुस्कियाँ।।
यादों के झीने पर्दे से जब झाँकती।
मुस्कराती बहुत चाय की चुस्कियाँ।।
किसी नादाँ कमसिन की अँगड़ाई सी।
दिल लुभाती बहुत चाय की चुस्कियाँ।।
सर्द रातों में बातों की मधुमास सी।
हैं जगाती बहुत चाय की चुस्कियाँ।।
मीत कहना न अब की पियेंगे नहीं।
रूठ जाती हैं ये चाय की चुस्कियाँ।।
मदभरी आँखों में भोर की किरणों सी।
डूब जाती हैं ये चाय की चुस्कियाँ।।
स्याह तनहाइयों ने डसा जब कभी।
यार भाती बहुत चाय की चुस्कियाँ।।
खिलखिलाती बहुत चाय की चुस्कियाँ।
हैं सताती बहुत चाय की चुस्कियाँ।।
– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश




