मनोरंजन
दो बात है साथी – शिप्रा सैनी

ख़बर लेना, ख़बर रखना, अलग दो बात है साथी।
निकट होना, निकट रहना, अलग दो बात है साथी।
दवा तो प्रेम ही है जो मिटा दे दूरी रिश्तों की,
असर होना, असर रहना, अलग दो बात है साथी।
सहा तुमने नहीं दूरी जरा सी जो बना ली मैं,
ख़फा होना, ख़फा रहना, अलग दो बात है साथी।
मिले थे जब, मिले हम क्या?मिला उत्तर यही मुझको,
सुलह होना, सुलह करना, अलग तो बात है साथी।
करा था फैसला की अब निभे रिश्ता जरा सतही।
बदल जाना, बदल पाना, अलग दो बात है साथी।
-शिप्रा सैनी मौर्या, जमशेदपुर




