मनोरंजन
-
शान्त हो मन आदियोगी – ऋतुबाला रस्तोगी
है विकल व्याकुल व्यथित चिंतित दुखित मन , अब बरसना चाहते हैं नेत्र सावन। घनन घन घन घनन घन घन…
Read More » -
“परछाइयां” – प्रियंका सौरभ
भूत की परछाइयों से कब तक यूं घबराओगे, आने वाले सवेरे को कैसे फिर अपनाओगे। छोड़ दो बीते पलों का…
Read More » -
मुक्तक- मणि अग्रवाल
सारे जग से तुम्हें छुपाकर, आँखों में मैंने बैठाया, बुरी नज़र से बचे रहो तुम, एक डिठौना माथ सजाया, जब…
Read More » -
किताब के पन्ने -भूपेश प्रताप सिंह
एक दूसरे से सटे अलग-अलग विचारों में बँटे बिना किसी संकोच के अमूर्त रूप में बतियाते रहते हैं किताब के…
Read More » -
ग़ज़ल – रीता गुलाटी
चलो जिंंदगी को हसीं हम बना दे। खुशी से रहे घर को जन्नत बना दे। न सोचो कभी तुम…
Read More » -
मेरे लिए – रश्मि मृदुलिका
आज पांव नहीं थके, आज पलकें थकी है रात भर ख़्यालों में, ये तुम्हारे संग जगी है…! तन्हा पहले भी…
Read More » -
हिंदी कविता – रेखा मित्तल
शाँत गम्भीर-सी यह झील मुझे रोज नई दिखाई देती हैं सुबह की ताजगी लिए लालिमा लिए सिंदूरी-सी झील में झाँकता …
Read More » -
कुहासे को चीरता गीत संग्रह ‘भर दो प्यार वतन में’ – सुधीर श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – मेरा मानना है कि मानव भाषा विकास के साथ ही गीत का जन्म हुआ होगा। गीत संप्रेषण की…
Read More » -
स्मृतियों में उजाला बनकर सदैव जीवंत रहेंगे धर्मेन्द्र – विवेक रंजन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com मुंबई – धर्मेन्द्र के जाने की खबर सुनते ही हम सब के मन पर जैसे एक पुरानी रोशनी बुझने…
Read More » -
पुरुष दिवस – सुनील गुप्ता
पुरुष दिवस हो पौरुषत्व भरा, महके दिन !!1!! हो मर्दानगी हर एक कर्म में, मुस्काए मन !!2!! है…
Read More »