मनोरंजन
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मशहूर कहावत – जसवीर सिंह हलधर
गाजर की घास हो या, छोटे वाला कांस होवे , इनको हटा के रखो खेत की किनारी से ।…
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आओ दीप जलाएं – अनिल भारद्वाज
जिसके घर की दिवाली से रूठा है उजियारा, उस शहीद के राष्ट्र प्रेम पर आओ दीप जलाएं। उसे दशहरा ढूंढ…
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प्रीत का श्रृंगार – ज्योत्सना जोशी
शून्य की अविश्रांत छाया यामिनी का विकल ताके तुम अंगुजित शोर में हो या अपरिहार्य स्वप्न में संवाद की…
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त्यौहारी सीजन का मारा….एक बेचारा (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – कहने को समाज आजकल नारी पुरुष एक समान की नीति पर चल रहा है। अधिकारों के नाम पर…
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दोनों अपने पाँव – सुनीता मिश्रा
दोनों पाँव ही अपने है लेकिन अलग-अलग से सपने है सपने सुहाने लड़कपन के.. खो गए जाने वें कहाँ,…
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दिले-ईमान तो भय क्या – गुरुदीन वर्मा
पिलाकर एक घूंट प्रेम की वो, हो जाते हैं इस गलत फहमी के शिकार, कि अपनी तो इसमें नफा…
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करें सत्कर्म – सुनील गुप्ता
( 1 ) करें सत्कर्म सतत निरंतर, चलें करते, श्रीहरि को अर्पित !! ( 2 ) यज्ञ कर्म निष्काम करते,…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
आज करती दुआ खैर,संसार की। माँगती मैं दुआ आज भरतार की। बात कैसे करे आज इंकार की। क्या…
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दोनों पाँव अपने – सुनीता मिश्रा
दोनों पाँव ही अपने है लेकिन अलग-अलग से सपने है सपने सुहाने लड़कपन के.. खो गए जाने वें कहाँ,…
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कविता – जसवीर सिंह हलधर
मौलिकता का ढोल पीटते, मौलिक कौन हुआ है बोलो । मौलिक जग निर्माता है, उसको कौन छुआ है बोलो…
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