मनोरंजन
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मेरी कलम से – रुचि मित्तल
फूल चाँदनी पर्वत अंबर सब कुछ अच्छे लगते हैं, जब से मुझको इश्क़ हुआ है सपने सच्चे लगते हैं। …
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हे कलम उठो – नीलांजना गुप्ता
हे कलम उठो कुछ सृजन करो! पहचानो उन जयचन्दों को चिन्हित कर दो सब द्वन्दों को भारत का स्व है…
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शून्य – सुनील गुप्ता
( 1 ) शून्य संग हम जुड़े रहें, नित अपना मूल्य बढ़ाते जाएं ! चलें इसका मोल समझते…, और अपनी…
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भोजपुरी कविता (नवकी रजाई) – श्याम कुंवर भारती
माघ जाड़ा के पाला जब पड़ा सब घुसे मंगाई नवकी रजाई। कौड़ा कौड़ी खोजे सब लोग बड़ा, ठिठुरत सिहरत तापी…
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शान्त हो मन आदियोगी – ऋतुबाला रस्तोगी
है विकल व्याकुल व्यथित चिंतित दुखित मन , अब बरसना चाहते हैं नेत्र सावन। घनन घन घन घनन घन घन…
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“परछाइयां” – प्रियंका सौरभ
भूत की परछाइयों से कब तक यूं घबराओगे, आने वाले सवेरे को कैसे फिर अपनाओगे। छोड़ दो बीते पलों का…
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मुक्तक- मणि अग्रवाल
सारे जग से तुम्हें छुपाकर, आँखों में मैंने बैठाया, बुरी नज़र से बचे रहो तुम, एक डिठौना माथ सजाया, जब…
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किताब के पन्ने -भूपेश प्रताप सिंह
एक दूसरे से सटे अलग-अलग विचारों में बँटे बिना किसी संकोच के अमूर्त रूप में बतियाते रहते हैं किताब के…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
चलो जिंंदगी को हसीं हम बना दे। खुशी से रहे घर को जन्नत बना दे। न सोचो कभी तुम…
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मेरे लिए – रश्मि मृदुलिका
आज पांव नहीं थके, आज पलकें थकी है रात भर ख़्यालों में, ये तुम्हारे संग जगी है…! तन्हा पहले भी…
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