मनोरंजन
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नन्हा रंग – डॉ. सत्यवान सौरभ
नन्हा रंग है बहुत प्यारा, सबको खुश करता सारा। लाल, पीला, नीला, हरा, रंगों का खेल बड़ा मज़ा। …
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प्रिय – रुचि मित्तल
मैंने भी तेरे शब्दों की उस भीगती छाँव में अपने मन के भीग जाने की कई ऋतुएँ देखी हैं।…
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गीत – मधु शुक्ला
वर्तमान में अभिनय सब कुछ, सबको प्यारा लगता है। भावों का संसार कैद में, हमको रखना पड़ता है। …
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विजय पर्व (दशहरा) – जसवीर सिंह हलधर
संसाधन शब्द स्वरूपा के । आराधन शक्ति स्वरूपा के ।। अब भेद विभीषण खोल दिया । हरि के कानों में…
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हिय मे मेरे बस तू – सविता सिंह
एषणा ये मेरी जरा सुन तो सखे परिरम्भण में तेरे तू मुझे रखे, प्रेम का मृदु संवाद हो जाएगा आ…
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प्रणयन कविता –अनुराधा
अश्रु में भीगे हुए कुछ छंद उर में मृदु पड़े हैं स्वर्ग सुख से,कम नही वे, मूर्त से सपनें…
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धैर्य की जीत – सुनील गुप्ता
( 1 ) धैर्य की जीत आनंद बरसाए, आस जगाए !! ( 2 ) प्रभु से प्रीत जीवन…
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भजन – नीलांजना गुप्ता
रे मनुआ साँसे छलती जाये, कालगति समझ न तुझको आये। लगा रहे नित जगत कर्म में, करे न…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
वो ऩज़रो को झुकाना जानते हैं। जो टूटा दिल,फसाना जानते हैं। वो सबको गुण सिखाना जानते है। प्रगति…
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मुझसे अब कुछ ना कहो तुम – गुरुदीन वर्मा
मुझसे अब कुछ ना कहो तुम, मेरा काम करने दो मुझको। करना है क्या, करना नहीं क्या, यह मालूम…
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