मनोरंजन
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राधिका जैसी वफा – ऋतु राधिका
नजरे तो मिल जाए दिल मिलते नहीं है, दिल को मिलाने की दवा कहां से लाओगे। भोलापन सादगी हो प्रेम…
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नन्हा खरगोश – डॉ. सत्यवान सौरभ
नन्हा खरगोश आया खेल में, लाल-लाल कान और प्यारा चेहरा। घास पर कूदे, मस्ती करे, दोस्तों संग खुशियाँ बांटे। …
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प्रणय का पल- सविता सिंह
प्रणय का पल प्रिये अनुपम, चमकती चाँदनी चम चम। कहो कैसे चले आए, निशा में कामिनी छम छम। कभी…
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वो मगर नहीं समझ सके हमको – गुरुदीन वर्मा
वो मगर नहीं समझ सके हमको, प्यार हमने किया बहुत जिनको। उम्मीद उनसे बहुत थी हमको, हमने माना था अपना…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
मिले प्यार हमको चलो हमनवां दे। रहे साथ मिलकर चलो अब वफा दे। नही आज कीमत असासा की घर…
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सामाजिक व्यवहारिक चिंतन का काव्य संग्रह है ‘श्वेता’ – सुधीर श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – वरिष्ठ कवि/शिक्षक/पत्रकार डा. ओम प्रकाश द्विवेदी ‘ओम’ जी का प्रस्तुत काव्य संग्रह श्वेता कवि के जीवन में घटित घटनाओं…
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बूढ़ा हुआ संसार? – प्रियंका सौरभ
**रजत के धागों से बुनी समय की श्वेत चादर, प्रशांत नभ की मौन गाथा, अतीत की बिखरी मुस्कान। सांसों…
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प्रचंड जीत – सुनील गुप्ता
प्रचंड जीत फिर आए नितीश, जन की जीत !!1!! मोदी का नारा विकास ही सहारा, झूठ नकारा !!2!! महिला युवा…
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ग़ज़ल – मणि अग्रवाल
लाचारी से पहले ख़ूब निहारेगा, तब ही कोई अरमानों को मारेगा। माँ-बाबा का हाथ न हो जिसके सर पर, कौन…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
देखता हरदम रहा तू आ छतों पर आज फिर। दिल जो जोड़ा,बात कर ले,तू खतो से आज फिर। छा…
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