मनोरंजन
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गीत- मधु शुक्ला
रीति सनातन सारे जग को भाती है। पितृपक्ष के गुण सब दुनियांँ गाती है।। बाढ़ आजकल आजादी की,आई…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
सज़न तुम पास मेरे आज आओ, ऩज़र से प्यार अपना तो ज़ताओ। मैं लिखती,खूब लिखती ग़ज़ल भी, ग़ज़ल अपनी भी…
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मेरी मर्जी … हाथ मिलाऊँ या न मिलाऊँ (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – जब मैं किसी की ज़िंदगी में नही झाँकना चाहता, तो कोई मेरी क्यों झाँके ? ज़रा जरा सी बात…
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पितृ ऋण – सुनील गुप्ता
( 1 ) पितृ ऋण उतारें जीवन रहते, कभी न इसमें कोताही करें !! ( 2 ) मात-पिता…
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क्यों बहा रहे हो आँसू ? – गुरुदीन वर्मा
क्यों बहा रहे हो आँसू , क्यों तुम्हें क्या नहीं मिला। मेरी किस्मत तो बुरी है, तुम्हें सुख क्या…
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हिंदी – डॉ.रेखा मित्तल
हांँ यह सच है हम हिंदी बोलते हैं गर्व है हमें अपनी मातृभाषा पर अपने मन की बात कह पाते…
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रेनकोट फिल्म- ज्योत्स्ना जोशी
utkarshexpress.com – जब मैंने पहली दफ़ा यह नाम सुना “रेनकोट” तो इस नाम ने मुझे इस क़दर फेसिनेटेड किया…
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तू ही मेरा श्रृंगार – सविता सिंह
संस्कार,सदाचार विचार,आचार तू ही मेरा श्रृंगार। अलंकार,उपहार आकार निराकार. सब तेरे ही है प्रकार नदी ,पोखर ताल तलैया तू ही…
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हिंदी दिवस (कुंडलिया छंद) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
भारत भाषा भाल की, हिंदी अनुपम शान। नाता सब से जोड़ती, बिना किसी अभिमान। बिना किसी अभिमान, प्रगति नित करती…
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नन्हा बादल – डॉ. सत्यवान सौरभ
नन्हा बादल उड़ता आसमान में, बारिश की बूंदें लाता अपने संग। खुशियों की सौगात देता हमें, धरती को हरा-भरा…
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