अपने लाल बहादुर – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

दो अक्टूबर जब भी आता,
छुट्टी सभी मनाते हैं।
इसके पीछे के कारण को,
सब जन सदा भुलाते हैं।
लाल बहादुर कद में छोटे,
लेकिन हिम्मत दिखलाई।
दुश्मन के घर घुस कर मारा,
तूती अपनी बुलवाई।
जय जवान सँग जय किसान का
नारा शुभ दे जाते हैं…1
रीति-नीति की बातें हो या,
राजनीति की चतुराई।
बुद्धि-युक्ति से हल वह खोजें,
सम्मुख हो जब कठिनाई।
दृढ़ता से लोहा लेते वे
कभी नहीं घबराते हैं…2
जीवन भले रहा हो छोटा,
काम बहुत से बड़े किये।
भारत की छवि उर में लेकर,
सदा देश हित मरे जिये।
ताशकंद की धरती पर भी,
निज डंका बजवाते हैं…3
महापुरुष उत्तम गुणवाले,
इनसे शिक्षा हम सब लें।
देशप्रेम, हिम्मत, चतुराई,
अपने अंदर हम भर लें।
लालबहादुर की गाथा सब,
सुनते-सुनाते हैं…4
सदा देश हित जीना-मरना,
यह संदेशा पाते हैं।
दो अक्टूबर जब भी आता,
छुट्टी सभी मनाते हैं।
-कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश




