कलम की आज़ादी -लोकतंत्र की साँस (आलेख) – डॉ अनमोल कुमार

utkarshexpress.com – 3 मई विश्व पत्रकारिता स्वतंत्रता क्यों?
1991, नामीबिया : अफ्रीकी पत्रकारों ने “विंडहोक घोषणापत्र” बनाया। बोले – “आजाद प्रेस बिना लोकतंत्र लंगड़ा है”।
1993, संयुक्त राष्ट्र : 3 मई को “World Press Freedom Day” घोषित किया।
मकसद : शहीद पत्रकारों को याद करना।
सरकारों को याद दिलाना – “प्रेस दबाओगे तो जनता सोचेगी तुम चोर हो”।
नागरिक को याद दिलाना – “झूठी खबर से आजादी खतरे में”।
2026 में पत्रकारिता की हालत –
पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर खतरा, पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं, बंधुआ मजदूर से भी बदतर हालात।
सरकार से आज़ादी – रिपोर्टर खबर छापे तो UAPA, मानहानि केस। गांव के पत्रकारों की जान जोखिम में।
आज़ाद न्यूज चैनल – विज्ञापन का गुलाम। मालिक बोले “नेता को मत छेड़ो”, खबर डब्बे में।
जनता तक सच – TRP के लिए “नाग-नागिन”, “भूत-प्रेत”। बाढ़-सूखा 30 सेकंड, सास-बहू , अपहरण, हत्या एवं सनसनीखेज न्यूज़।
डिजिटल आज़ादी – यूट्यूब-व्हाट्सएप पर 1 मिनट में अफवाह, फॉरवर्ड करने वाला “एडिटर”, बिना तनख्वाह के।
शहीद आंकड़ा – UNESCO – 2023-25 में 130 पत्रकार मारे गए। गाजा, यूक्रेन, म्यांमार। भारत में भी 5 साल में 20 पत्रकारों की हत्या। कैसी स्वतंत्रता? (विश्व पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस पर आलेख – 3 मई)



