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जेठ माह के अष्टम बड़े मंगल – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

मारुति नंदन कष्ट निकंदन जीवन में खुशियाँ भर देना।
मानव को ग्रस ले यदि संकट दूर तभी उसको कर देना।
भक्त कुमार्ग चले जब भी तब बुद्धि विवेक पुनः भर देना।
विघ्नविनाशक हस्त सदा हर मस्तक पे प्रभु जी धर देना।9
हे बजरंगबली सुन लो विनती हर लो सब पाप धरा से।
संकट मोचक हे बलबीर हरो विपदा हर आप धरा से।
बाण चला बजरंग महातम नष्ट करोसंताप धरा से।
त्रस्त हुई जिनसे जनता सब दूर करो अभिशाप धरा से।10
नाम बड़ा हनुमान सुपावन संकट में उपकार करो ना।
घोर विपत्ति दिखे हर ओर लगा कर युक्ति तुरंत हरो ना।
संकट मोचक हे बजरंग दुखी जन में नव आस भरो ना।
मंगल वार तथा शनि वार अशीष भरा तुम हाथ धरो ना।11
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश




