धर्म

दोहे (पुरी रथयात्रा) – सुधीर श्रीवास्तव

होती जय-जयकार है, जगन्नाथ सरकार।।
निकल पड़े रथ बैठकर, उल्लासित संसार।।

रथयात्रा रथ खींचकर,पुण्य कमाते लोग।
जगन्नाथ प्रभु जी हरें, भक्त जनों के रोग।।ं

रथयात्रा रथ थामकर, कहें मित्र यमराज।
जगन्नाथ प्रभु दीजिए, सेवा अवसर आज।।

गुड़िचा में नौ दिन प्रभो, बसें भक्त के साथ।
तरसे दर्शन को जगत, जोड़े दोनों हाथ।।़

रथ यात्रा की वापसी, बजे शंख औ ढोल।
जगन्नाथ फिर आ रहे, भक्त खिले अनमोल।।

जगन्नाथ प्रभु कीजिए, आप जगत उद्धार।
जन-मन सब खुशहाल हो, आपस में हो प्यार।।

  • सुधीर श्रीवास्तव, गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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