राष्ट्रीय हिंदी दिवस 2026 : इतिहास, महत्व और बिहार संदर्भ – डॉ अनमोल कुमार

utkarshexpress.com – 14 सितम्बर 2026 के दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए हर साल 14 सितम्बर को हम राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाते हैं।
इसी तिथि को ही क्यों मान्य हुआ? – साल के 365 दिन में से 14 सितम्बर को ही क्यों चुना गया, इसके दो ठोस कारण हैं। 15 अगस्त 1947 के बाद संविधान बन रहा था और भाषा पर 3 साल तक बहस चली। अंत में 14 सितम्बर 1949 को वोटिंग हुई और तय हुआ कि “संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी”, जो संविधान के अनुच्छेद 343(1) में लिखी गई। इसी दिन हिंदी के महान सेनानी ब्यौहार राजेन्द्र सिंह (ब्यौहार = प्राचीन काल की महाजन / कोषाध्यक्ष की उपाधि) का जन्मदिन भी है, जिन्होंने हिंदी के पक्ष में सबसे मजबूत प्रस्ताव रखा था। 1953 में पंडित नेहरू ने पहली बार इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।
हिंदी दिवस 2026 का महत्व – इस वर्ष राजभाषा विभाग ने थीम रखी है – “हिंदी – तकनीक से जन-जन तक”। आज हिंदी केवल राजभाषा नहीं, विश्वभाषा है। बिहार के संदर्भ में इसका विशेष महत्व है क्योंकि बिहार हिंदी की प्रयोगशाला है, जहाँ भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका हिंदी को समृद्ध करती हैं और लोअर प्राइमरी से लेकर Ph.D., http://D.Litt. तक की पूरी शिक्षा यात्रा हिंदी माध्यम से ही पूरी होती है। डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “Linguistic Survey of India” में उक्त सभी उप-भाषाओं को सगी बहनें कहकर अलंकृत किया था, जिसका मूल हिंदी है। हमारा संकल्प : हम हिंदी में हस्ताक्षर करेंगे, कार्यालय और शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देंगे और अपनी मातृभाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी को जोड़ने वाली भाषा बनाएंगे।
हिंदी है हम, वतन है हिन्दोस्ताँ।




