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गतस्य शोचनम नास्ति एंवई – अनुराधा पांडेय

दिल्’ली से ‘दिल’ लग गया, ‘दिल’ वो बैठा हार।
दो दिन की थी ‘दिल्’लगी, दो दिन का ‘दिल’दार।।
दिल्’ली ‘दिल’ से ‘दिल’नशी, वो ‘दिल’ से ‘दिल’शाद।
उसके ‘दिल’ में आज भी, ‘दिल्’ली जिन्दाबाद।।
दिल’बर दिल’कश दिल’नवा, दिल’जू या ‘दिल’दार?
यों दिल’दारी मत करो, दिल्’ली से सरकार।।
इतने संग’दिल’ मत बनो, माना ‘दिल्’ली दूर।
हाल-ए-‘दिल’ हमसे कहो! सब शर्ते मन्जूर।।
(गतस्य शोचनम नास्ति एंवई – बीते हुए समय का कोई शोक नहीं)
– अनुराधा पाण्डेय, द्वारिका , दिल्ली




