मनोरंजन

नियति – सुनील गुप्ता

नि यत नेक

चले भाग्य जगाए…,

शांति दिलाए    !! 1 !!

 

य म नियम

चले जो अपनाए…,

आनंद पाए     !! 2 !!

 

ति तीर्षु बनें

चलें रमते ‘ स्व ‘, में..,

सुकून पाएं       !! 3 !!

 

नियति सदा

बनें प्रकृति से ही…,

चित्त खिलाएं     !! 4 !!

तितीर्षु =मोक्ष प्राप्त करने की कामना

करने वाला।

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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